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Tuesday, 16 July 2013

प्यार हुआ इकरार हुआ

तुम  ही  हो 
♥तूझे  अपने  हाथों  कि  लकिरों  में  ना  बसाया तो फिर केहना

आके  तूझे  तेरे  ख़्वाबों में  ना  सताया  तो  फिर  केहना

♥तेरी  सोच  में  गुजर  जाती  है  सारी  रात  जिंदगी  भर

रातों  को  ना  जगाया  तो  फिर  केहना

♥ढूँढते  फिरोगे  तुम  हर  जगह  हमको  अपने  इश्क  में

तूझे  पागल  ना  बनाया  तो  फिर  केहना

♥तुम  को  औरों  ने  चाहा  होगा

"मेरी  जान  तुम्हें  अपने  आपसे  ज्यादा  ना  चाहा  तो  फिर  केहना"

.··٠٠••●●♥♥ღ 


Saturday, 8 June 2013

तू एक एहसास है













अंजान राहों में कुछ ख़ास है 
बारिश कि बूंदों में तेरा साज़ है 
टिप -टिप बरसता होठों से नीचे सरकता
उस पानी को भी तेरी प्यास है

घड़-घडाता बादल सून ज़रा कुछ कहता है
कोई तूझे कहीं बड़ी शिद्दत से पुकारता है 
मेरे इंतज़ार कि अब और न ले इम्तिहाँ 
आ भी जा अब क्यूँ इन बाँहों को तरसाता है 

ये तेज़ हवाएँ आज तन को ऐसे लिपट गई 
बंद नैनों में जेसे तेरी परछाई समा गई
तेरी आहट से धड़कने बढ़ने लगी 
जुल्फों से खेलती तेरी उंगलियाँ पलकें झूका गई

पहाड़ों से टकराकर जेसे गूंजती हैं लेहरें 
तेरे स्पर्श को वेसे महसूस करती हैं साँसें
डूब जाना चाहती हूँ उनकि आँखों में 
समुंदर से भी गेहरी हैं वो निघाहें 

Saturday, 11 May 2013

एक दिल और सही

तेरी उन आखों को परख लिया होता
तो इन आँखों में आंसुओं का निशान न होता 













तुमसे क्या मिले जिंदगी को नए मायने मिल गये
तुम्हारा साथ क्या मिला किसिकी  कमी महसूस हि नहीं हुई
दर्द भरे सिने कि हर चोट का मरहम बन गये
तुम पास क्या थे जेसे मैं दुरियों का मतलब भूल हि गई

आज तुम साथ नहीं तो अकेलापन काटने दौड़ता है
अपनों में अपने आपको ये दिल कहीं खोझता है

किससे करें अपने दिल -ओ-दर्द  कि दास्ताँ बयान
हम इस ग़लतफहमी में रह गये तुम रहोगे सदा बाहों में मेरे
दुनिया कि परवाह नहीं की सपनों का बना लिया आशियाँ
आज भी उन्हीं टूटे सपनों के शीशे चुभते हैं इन आँखों में मेरे

P.S. : Verses defines the title, "one more heart is broken in this way" !

Sunday, 28 April 2013

काश तुम मेरे होते

चाहा है तुझको चाहूंगा हर पल   

















उस नूर से बढ़कर चाहते तुझे ,
उस अंबर से बढ़कर सराहते तुझे,
दिल में कभी दर्द न होता तेरे,
तेरी पलकों पे अश्क के छींटे न होते,
यह वादा था मेरा, काश तुम मेरे होते ।

उस ग़ैर कि बाहों में नहीं देख सकते तुझे,

उस मुस्कुराहट में मेरे लिए तड़पता नहीं देख सकते तुझे,
वक़्त लगता पुरे होते सपने सारे तेरे,
तेरी पलकों पे अश्क के छींटे न होते,
यह वादा था मेरा, काश तुम मेरे होते ।

उस एक पल ने रुसवा कर दिया तुझे,

उस एक घड़ी कि कशिश ने तोड़ दिया मुझे,
नाकर मेरी बराबरी घेरों से दिल को तकलिफ होगी तेरे,
तेरी पलकों पे अश्क के छींटे न होते,
यह वादा था मेरा, काश तुम मेरे होते ।

उस ग़ैर को तुने अपनाया चाहता है वो तुझे,

उस आशिक में न ढूंढ़ मुझे दर्द होगा तुझे,
क्यूँ  इतनी कश्मकश में हैं बुने सपने तेरे,
तेरी पलकों पे अश्क के छींटे न होते,
यह वादा था मेरा, काश तुम मेरे होते ।

ऐ सनम ना तड़प तू  मेरे लिए,

ना तड़पा उसे अपनी आशिकी में अपने लिए,
नहीं सेह पायेंगे अगर कहेगा बेवफा वो तुझे,
तेरी पलकों पे अश्क के छींटे न होते,
यह वादा था मेरा, काश तुम मेरे होते ।


P.S. - I dedicate this poem to my buddy who is still in love with his girlfriend knowing that they can't be together ever. He neither complain about his life nor his partner for not being by his side, rather he's happy for all those beautiful memories which wouldn't have been worth keeping in the memory lane had it not been with her. She loved him too, but circumstances & situations won over their LOVE! Though she has found her Life-Partner who share tonnes of LOVE with her, she's sad as she compares her PARTNER with my BUDDY, जिसकी मोहब्बत का कोई मुकाबला ही नहीं .....ऐसा है मेरा ये दोस्त, पर...... जैसा भी है, मुझे बोहत - बोहत प्यारा है मेरा ये दोस्त :) 








Friday, 12 April 2013

वो बेपनाह मोहब्बत उसकी

क्यूँ हमें उनसे मोहब्बत नहीं कराता खुदा , जो सिर्फ हमें है चाहता ?
उसने हमें चाहा था कभी 
हम चाहकर भी उसे चाह न सके कभी 
इकरार-ए -मोहब्बत की जब उसने 
इनकार कर गए क्योंकि वो चाहत ही न थी उससे कभी
भरी मेहफिल में बेवफा कह गया वो हमें
वफ़ा निभाकर भी गुन्हेगार साबित कर गया वो हमें ।  

तकरार ही न होती कभी 
इश्क कि तालिब न की होती उसने अगर कभी
उस अटूट रिश्ते की अनचाही हालत न होती 
उस पल अगर तुम्हारे अश्कों की बरसात न होती
उम्रभर तुम्हारा हाथ नहीं थाम सकते मालूम था तुम्हे
फिर क्यूँ अंजानो की तरह वो बेपनाह प्यार कर गया हमें । 

क्यूँ उम्मीद का दीप जलाये बैठा है वो आज भी 
क्यूँ अपनों के बीच अकेला है वो आज भी 
उस आज़ाद पंछी की क्यूँ थम सी गई है जिंदगी 
वो खिलखिलाता चेहरा , क्यूँ गुमसुम हो गई मुस्कान उसकी
उसी दीप की अग्नि में तड़पता है वो आज भी 
"या खुदा ना जला अपनी मोहब्बत में उसे इतना "
            इस  दोस्त की आँखों से छलकता  है वो आज भी 

मैंने उसे एक दिन कहा ,
"मानोगे मेरी एक सलाह माना होगा अगर दोस्त मुझे कभी ,
बढ़ जाओ जिंदगी में आगे वक़्त है अब भी "
मुस्कुराया वो अरसों बाद और कहने लगा ,
"जो थाम लूँ अगर साथ अंजना न चाह कर भी ,
रहेगा तूही सदा मेरा इश्क बनकर इस दिल में तब  भी "
न मिलें उस पल बाद हम-तुम कभी 
जब भी आता है उस पल का ख़याल,
          थम सी जाती है जिंदगी मेरी आज भी । 


Tuesday, 6 November 2012

YE PAL HUMEIN YAAD AAYENGE, WO KAL HUMEIN YAAD AAYENGE



School me the, toh college k palon ko jina chahte the,
college me kadam rakhte hi, apne school ko mis krne lage.
Na chahte hue bhi school me sabse milna padta tha,
or College me chahkar bhi sabse milna nhi hota.
14 saal school k or college k 5 saal, lo aaj khatm ho gye,
19 saal k iss safar me na jane kab “MEIN“ se “HUM” ho gye.

College ka khayal aate hi, yaadon ki leher daud jati hai,
Saath me jiye us har ek pal ki jiti jagti dastan suna jati hai.
College ka pehla din, boht sharif-sharif sa laga tha,
Gujrate dinon k sath apnepan ka ehsas hone laga tha.
Masti itni ki, ki kabhi akelapan mehsus hua hi nhi,
Apnapan itna mila doston se ki, ab bichadna gawara hi nhi.

“ROYAL”(my junior college) ko “JAIL” kehna galat to nhi hai,
Par rules todkar milnewale maze ki, “KYA BAAT HAI”
Sharafat se lecture bunk kiye toh, pakde gye,
3rd floor se staff room k samne bag catch karwakar, aazad ho gye.
School me jo likhna sikha, college ki benches par toh stamp lagani hi thi,
Kbhi gaane,kbhi quotes,toh kbhi shayari, benches me jaan toh dalni hi thi.


6.18 a.m. ki local ki shuruat, kabile tariff  hua karta tha,
Kehna hi kya MONIKA k us “DHOKLE” k dabbe ka,
          Jo subah-subah hi saaf ho jaya karta tha.
“SOUTH INDIAN DISHES’ Vihar(restro) ki badi yaad aati hai,
Charni road ki wo famous “CHOCO-SHAKE” aj bhi muh me pani le aati hai.
Raju stall ki “SANDWICH” ki yaadein bhi kya namkin hai,
“H.R.”(my graduating college) ki “CHINEESE” ko bhulna,
        mushkil hi nhi na-mumkin hai.

1 minute pehle class me entry ki attendance ki khushi,
Ab shayad kbhi nhi jee payenge.
Railway concession ki line me khade hokar,
Ab shayad us “BUDDHE” ko aadhe ghante tak gaaliyan kbhi nhi denge.
“R u cmng 2 coll”,”Meet me in coll”,”C u aftr class”,
Ab shayad ye msgs kbhi nhi kr payenge.
Examz k 1 din pehle IMPORTANCE lene k liye,
Ab shayad kisi ANJANA-ANJANI k piche kbhi nhi bhagenge.

CHOD AAYE HUM WO COLLEGE KI GALIYAN,
AAKHIR PURA HO HI GAYA “GRADUATION” KA KARWAN.
WO AASUON K PAL, AJ HANSI ME BADAL JAYENGE,
WO MUSKURATE HUE KAL, AJ RULA JAYENGE.
YE PAL HUMEIN YAD AAYENGE,
WO KAL YAAD AAYENGE!